उदय हुआ सूरज पूरब से, नभ में छायि लाली| न रही रात, न रहा अंधियारा, न रही चंदा की उजियली|
डाल-डाल पर बैठे पंछी, चह-चह, चह-चह चहक रहे हैं| खिले कुसुम, मुस्काईं कलियाँ, सारे उपवन महक रहे हैं|
पवन बह रही धीमी-धीमी, शीतल, मंद और सुखदाई| जाग गए हैं खेत-बाग-वन, पेड़-पेड़ ले रहा है अंगड़ाई|
कण-कण पर बिखरे हैं मोती, कण-कण बिखरी हैं मणियाँ| कितनी मनोहर कितनी सुंदर सुखद सुहानी ये घड़ियाँ|
—————————————————- I am sure most of you enjoyed this. Now this is what you need to do next:
पढ़ो, समझो और उत्तर दो: (क) सूरज किस दिशा से निकलता है? (ख) डालियों पर पक्षी क्या कर रहे हैं? (ग) किस प्रकार की वायु प्रवाहित हो रही है? (घ) प्रातः का समय कैसा होता है?
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I mean, WTF? This is not how I remember being introduced to Poems in my second grade. What happened since then?